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RBI ऑटो लोन व पर्सनल लोन की मौजूदा दरों में करीब साल भर तक और गिरावट की संभावना कम

Dec 5, 2020

चालू साल के दो तिमाहियों में आर्थिक गिरावट के बाद अर्थव्यवस्था अब मौजूदा तिमाही से विकास की पटरी पर लौट आएगी। लेकिन महंगाई के मोर्चे पर स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। सिर्फ चालू वित्त वर्ष में ही नहीं बल्कि अगले वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (सितंबर, 2021) तक खुदरा महंगाई की दर आरबीआइ के लक्ष्य यानी 4 फीसद से ज्यादा रहने के आसार हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो होम लोन, ऑटो लोन जैसे दूसरे पर्सनल लोन की जो दरें अभी बाजार में उपलब्ध हैं उनमें तकरीबन साल भर तक और गिरावट की संभावना कम है। शुक्रवार को आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की तरफ से पेश मौद्रिक नीति समीक्षा का लब्बो लुआब यही है।

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोविड-19 की मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर केंद्रीय बैंक की तरफ से कर्जदाताओं (बैंक/NBFCs) को इस बात की अनुमति है कि वे कॉरपोरेट और व्‍यक्तिगत कर्ज लेने वालों के लोन्‍स रीस्‍ट्रक्‍चर करें। हालांकि, उन्‍होंने यह स्‍पष्‍ट नहीं कहा कि लोन मोरेटोरियम की अवधि में इजाफा किया गया है या नहीं। इस पर स्‍पष्‍टता का अभी इंतजार है।

चेक भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि 50,000 रुपये और उससे अधिक मूल्य के सभी चेक के लिए सकारात्मक वेतन का एक मेकेनिज्म शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह मूल्य के कुल चेक का लगभग 20 फीसद और 80 फीसद क्रमशः कवर करेगा। इस संबंध में परिचालन संबंधी दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

शुक्रवार को आरबीआइ ने रेपो रेट (होम लोन, ऑटो लोन जैसे सावधि कर्ज की दरों को प्रभावित करने वाली दर) को 4 फीसद पर स्थिर रखा गया है। यह लगातार तीसरी मौद्गिक नीति समीक्षा है जिसमें रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वैसे जनवरी, 2019 के बाद से आरबीआइ गवर्नर दास रेपो रेट में 250 आधार अंकों (2.50 फीसद) की कटौती कर चुके हैं। इसकी वजह से अभी होम लोन और ऑटो लोन पिछले एक दशक के सबसे कम दर पर उपलब्ध है। जानकारों का कहना है कि अभी देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना भी जरूरी है इसलिए आरबीआइ ब्याज दरों को फिलहाल बढ़ाने से परहेज करेगा।